पालघर : युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत युवाओं को सात्विक भोजन बनाने की कला सिखाकर उन्हें कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसी क्रम में पालघर जिले की वाडा तहसील के हमारापुर-गालतरे स्थित गोवर्धन इकोविलेज में ‘गोवर्धन स्कूल ऑफ कुलिनरी आर्ट्स – ईश्वरस्वाद सेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट इन सात्विक कुकिंग’ का शुभारंभ किया गया है। इस संस्थान में पालघर जिले सहित देशभर के युवाओं को सात्विक पाक-कला का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वही इसे लेकर गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरांग दास ने कहा कि पालघर स्थित गोवर्धन इकोविलेज परिसर में स्थापित यह विश्व का पहला सात्विक पाक-कला विद्यालय बताया जा रहा है। यहां आधुनिक रसोई प्रयोगशालाएं, बेकरी और कन्फेक्शनरी इकाइयां, डेमो किचन, फूड फोटो स्टूडियो, रेस्तरां और बुफे क्षेत्र के साथ-साथ अत्याधुनिक कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और आधुनिक प्रशिक्षण मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि मुफ्त में मिलने वाली चीजों की अक्सर कद्र नहीं होती, इसलिए इस कोर्स के लिए नाममात्र की फीस रखी गई है।
गौरांग दास ने बताया कि यह संस्थान भारत की पारंपरिक खाद्य परंपराओं को पुनर्जीवित करने और सात्विक पाक-कला के प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। यह अपने प्रकार का पहला संस्थान है, जो सात्विक भोजन की शिक्षा और कौशल विकास के लिए समर्पित है। इस विद्यालय की स्थापना सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ क्यूलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशन साइंसेज और सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी पुणे के शैक्षणिक सहयोग से की गई है। इस पहल को अमेरिका स्थित उद्यमी ईशिता डे वाधवानी और डैनी वाधवानी का सहयोग प्राप्त हुआ है।
उनका कहना था कि भोजन केवल पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, पर्यावरण, समानता और चेतना का प्रतीक भी है। गोवर्धन स्कूल ऑफ कुलिनरी आर्ट्स के माध्यम से ऐसे पाक-कला विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे, जो भोजन को विज्ञान के साथ-साथ एक पवित्र जिम्मेदारी के रूप में भी समझें।
वहीं ईशिता डे वाधवानी और डैनी वाधवानी ने कहा कि उन्हें इस पहल का समर्थन करते हुए गर्व महसूस हो रहा है। उनका मानना है कि यह पहल संस्कृति, पर्यावरण और पाक-कला के बीच संतुलन स्थापित करते हुए पालघर को सतत पाक-शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
इस अवसर पर एसएससीएएनएस के प्रो. अतुल गोखले तथा भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव डॉ. नवलजीत कपूर समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे और उन्होंने भी अपने विचार व्यक्त किए।

